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आरबीआई ने बैंक खाता नियमों में किया बदलाव, अब फ्री में उठा सकेंगे यह सुविधा







एनडी न्यूज, नोहर। आरबीआई द्वारा खाता नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। आरबीआई की तरफ से जारी नई गाइडलाइन के तहत कोई बैंक अब ग्राहकों का जीरो बैलेंस अकाउंट खोलने से मना नहीं कर सकता। आरबीआइ ने इस संबंध में मसौदा जारी किया है, जिसमें बैंकों में बेसिक बचत खाता रखने वालों को कई राहत दी गई हैं।

जीरो अकाउंट बैलेंस वाले जनधन खाताधारकों सहित बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (बीएसबीडी) खाताधारक डिजिटल बैंकिंग सुविधा का लाभ फ्री उठा सकेंगे। अब तक यह सुविधा सिर्फ रेगुलर बैंक सेविंग्स अकाउंट पर मिलती है। नए नियम 31 मार्च 2026 से लागू हो सकते हैं। आरबीआइ ने प्रस्ताव दिया है कि बैंकों को शून्य-बैलेंस खातों के लिए स्पष्ट शर्तें, सेवाओं की सीमा और फीस से जुड़ी पारदर्शिता तय करनी होगी।

बीएसबीडी खाता क्या है?

बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट किसी भी बैंक में खुलवाए जाने वाला सबसे प्राथमिक खाता होता है, ताकि खाताधारकों को जरूरी बैंकिंग सेवाएं बिना किसी शुल्क के मिल सके। बैंक बीएसबीडी अकाउंट होल्डर्स को फ्री एटीएम कार्ड भी इश्यू करते हैं। इसके लिए केवाइसी मानदंड काफी सरल होते हैं। बीएसबीडी खाताधारक उस बैंक में कोई अन्य सेविंग्स बैंक अकाउंट नहीं खोल सकते। अगर ग्राहक के पास बैंक में कोई अन्य बचत खाता है तो उसे 30 दिन के भीतर बंद करना होगा।

इसका फायदा किसे होगा?

कम आय वर्ग और ग्रामीण ग्राहक, जिनके लिए न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना मुश्किल होता है। नए बैंक ग्राहक जिन्हें डिजिटल माध्यम से आसान बैंकिंग चाहिए। बैंकों को भी लाभ, क्योंकि इससे खाता डेटा एकसमान होगा और नियामकीय अनुपालन आसान बनेगा।

2,175 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला सरकारी बैंकों ने 2024-25 में बैंक खातों में मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर, पिछले 5 साल में 8,933 करोड़ वसूले। प्राइवेट बैंकों का डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह राशि भी करोड़ों में हो सकती है।

आरबीआइ का मानना है कि अलग-अलग बैंकों में शून्य-बैलेंस खातों के नियमों में असमानता से ग्राहक भ्रमित होते हैं। कुछ बैंक अनावश्यक चार्ज लगाते हैं और योजना-आधारित खातों (जैसे जनधन) का दुरुपयोग बढ़ता है।

खाताधारकों को क्या सुविधाएं मिलेंगी?

इस खाते के अंतर्गत बैंक शाखाओं और एटीएम से नकद जमा और महीने में कम से कम चार निकासी मुफ्त में की जा सकती है। मुफ्त लेन-देन की सीमा से ज्यादा लेनदेन करने पर बैंक शुल्क ले सकते हैं। इन अकाउंट्स में इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट चैनल्स के जरिए पैसे जमा किए जा सकते है। अभी इनमें कई डिजिटल बैंकिंग फैसिलिटीज उपलब्ध नहीं हैं।

हर ग्राहक को एक ही बैंक में सिर्फ एक जीरो बैलेंस अकाउंट रखने की अनुमति होगी, ताकि योजनाओं में गड़बड़ी न हो। खाते खोलते समय ग्राहक को यह घोषणा करनी होगी। ग्राहक चाहे तो इन्हें नियमित बचत खाते में अपग्रेड भी कर सकता है। इन खातों में चेकबुक, डेबिट कार्ड या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की सुविधा सीमित या वैकल्पिक हो सकती है।

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