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मानसून में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा ! जाने बचाव के उपाय

By admin | 02 Jul 2025, 07:40 AM Category: मौसम
मानसून में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा ! जाने बचाव के उपाय

एनडी न्यूज नेटवर्क। मानसून में बारिश की बूंदें गर्मी से राहत तो देती हैं, लेकिन यह अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी लेकर आती हैं। हवा में नमी और उमस फंगस और बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल वातावरण है। ये सूक्ष्मजीव त्वचा, रेस्पिरेटरी तंत्र और पाचन तंत्र पर आक्रमण कर सकते हैं, जिससे कई तरह के इन्फेक्शन हो सकते हैं।

बरसात के मौसम में हवा में नमी का लेवल बढ़ जाता है। यह फंगस और बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों के लिए अपना कुनबा बढ़ाने के खातिर आदर्श परिस्थितियां है। फंगस के बीजाणु हवा में फैलते हैं और नम सतहों, जैसे गीले कपड़े, जूते या घर की दीवारों पर आसानी से जम जाते हैं। बैक्टीरिया भी नमी और गर्मी में तेजी से बढ़ते हैं, खासकर जब गंदगी मौजूद होती है। यही कारण है कि बारिश में स्किन और रेस्पिरेटरी संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

आज हम मानसून में होने वाली परेशानियों के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • मानसून में किन बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है?
  • कैसे हम अपनी सेहत का ख्याल रख सकते हैं?
  • अगर इन्फेक्शन हो जाए तो क्या करें?

बरसात में होने वाली बीमारियां

बरसात के मौसम में कुछ बीमारियां थोड़ी सी लापरवाही से हो जाती हैं। इनके लक्षणों को पहचानना जरूरी है, ताकि समय पर बचाव या इलाज किया जा सके। यहां बारिश में होने वाली कुछ प्रमुख बीमारियां देखते हैं:

फंगल इन्फेक्शन

एथलीट्स फुट

यह पैरों की त्वचा पर होने वाला फंगल इन्फेक्शन है, जो मुख्य रूप से पैरों की उंगलियों के बीच होता है। यह तब होता है जब पैर लंबे समय तक नम बने रहते हैं।

लक्षण: तेज खुजली, लालिमा, त्वचा का छिलना और कभी-कभी दर्द या जलन।

रिंगवर्म

यह त्वचा पर गोलाकार दाग के रूप में प्रकट होता है, जो डर्माटोफाइट्स फंगस के कारण होता है। यह एक-दूसरे को छूने से फैल सकता है।

लक्षण: गोल, लाल दाग जिनके किनारे उभरे हुए होते हैं, बीच में हल्का रंग और लगातार खुजली।

जॉक इच

यह कमर, जांघों और कमर पर होने वाला फंगल इन्फेक्शन है, जो पसीने और नमी के कारण बढ़ता है।

लक्षण: लालिमा, तेज खुजली, त्वचा का छिलना और कभी-कभी बदबू।

वल्वोवेजाइनल कैंडिडिआसिस

यह महिलाओं की वेजाइना में कैंडिडा फंगस के कारण होने वाला इन्फेक्शन है, जो नमी और गर्मी में बढ़ता है।

लक्षण: तेज खुजली, सफेद गाढ़ा स्राव, जलन और असहजता।

रेस्पिरेटरी फंगल इन्फेक्शन

यह फेफड़ों में होने वाला फंगल इन्फेक्शन है, जो हवा में मौजूद फंगस के बीजाणुओं से होता है। इससे कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग अधिक प्रभावित होते हैं।

लक्षण: लगातार खांसी, सांस लेने में कठिनाई, बुखार और थकान।

बैक्टीरियल इन्फेक्शन

गैस्ट्रोएंटेराइटिस

यह दूषित भोजन या पानी के सेवन से होने वाला बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।

लक्षण: पानी जैसे दस्त, उल्टी, पेट में मरोड़ और हल्का बुखार।

टाइफाइड

यह सैल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होने वाली डिजीज है, जो दूषित भोजन या पानी से फैलता है।

लक्षण: लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, पेट में दर्द, सिरदर्द और भूख न लगना।

कॉलरा

यह वाइब्रियो कोलेरा बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो तेजी से डिहाइड्रेशन का कारण बनता है।

लक्षण: अचानक और गंभीर पानी जैसे दस्त, उल्टी, तेज प्यास और मांसपेशियों में ऐंठन।

मानसून में बीमारियों से खुद को बचाने के 15 तरीके

डॉ. ऋषिकेष देसाई कहते हैं कि कुछ आसान उपाय अपनाकर आप बरसात के मौसम में फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बच सकते हैं। इन उपायों के पीछे का विज्ञान भी समझिए ताकि आपकी समझ इसे लेकर और बेहतर बन सके।

1. रोजाना नहाएं और त्वचा को सूखा रखें

गुनगुने पानी और हल्के साबुन से नहाएं। नहाने के बाद तौलिए से स्किन को अच्छी तरह सुखाएं, खासकर उंगलियों के बीच का पानी अच्छे से पोछ लें।

2. कॉटन के ढीले कपड़े पहनें

कॉटन के हल्के कपड़े पहनें। बारिश में भीगने पर तुरंत सूखे कपड़े पहनें। सिंथेटिक कपड़े नमी को त्वचा के पास रोकते हैं, जिससे फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है। कॉटन हवा का संचार बनाए रखता है और नमी को जल्दी सूखने देता है।

3. पैरों को साफ और सूखा रखें

रोजाना पैरों को साबुन से धोएं, उंगलियों के बीच अच्छी तरह पानी सुखाएं और जरूरत हो तो एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल करें। पैरों में जमा नमी एथलीट्स फुट का कारण बनती है। सूखे और साफ पैर फंगस को नहीं पनपने देते हैं।

4. गीली जगहों पर जूते पहनकर निकलें

गीली सड़कों, पार्कों या सार्वजनिक शौचालयों में रबर सैंडल या वाटरप्रूफ जूते पहनें। नंगे पैर चलने से त्वचा सीधे फंगस और बैक्टीरिया के संपर्क में आती है। जूते एक सुरक्षात्मक परत की तरह काम करते हैं।

5. घर को साफ और सूखा रखें

बाथरूम और रसोई को कीटाणुरहित करें। डी-ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें और तौलिए, चादरें बार-बार धोकर सुखाएं। नम और गंदे स्थान सूक्ष्मजीवों के लिए प्रजनन स्थल होते हैं। सूखा वातावरण उनकी ग्रोथ नहीं होने देता है।

6. तौलिए और जूते शेयर न करें

अपने तौलिए, मोजे, जूते या नेल-कटर व्यक्तिगत रखें। फंगल इन्फेक्शन संपर्क से फैलते हैं। व्यक्तिगत सामान का उपयोग इस जोखिम को कम करता है।

7. एंटीफंगल क्रीम या पाउडर का उपयोग करें

त्वचा पर खुजली या लालिमा होने पर ओवर-द-काउंटर एंटीफंगल प्रोडक्ट लगाएं। गंभीर स्थिति में डॉक्टर से मिलें। ये प्रोडक्ट फंगस की सेल्स को नष्ट करते हैं, जिससे उनका विकास रुक जाता है।

8. फल, सब्जियां और दही खाएं

ताजे फल, हरी सब्जियां और प्रोबायोटिक्स युक्त दही को भोजन में शामिल करें। विटामिन और मिनरल्स इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं। प्रोबायोटिक्स आंत में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जो इन्फेक्शन से लड़ते हैं।

9. उबला हुआ पानी पिएं

पानी को 10 मिनट तक उबालें या फिल्टर करें। बाहर मिलने वाली ड्रिंक्स और जूस से बचें। पानी उबालने से बैक्टीरिया मर जाते हैं, जिससे टाइफाइड और कॉलरा जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है।

10. मच्छरों से बचाव करें

मच्छर भगाने वाली क्रीम, नेट या कॉइल का उपयोग करें। पानी जमा न होने दें। मच्छर मलेरिया और डेंगू फैलाते हैं, जो इम्यूनिटी को कमजोर करते हैं और अन्य इन्फेक्शन का जोखिम बढ़ाते हैं।

11. स्किन को मॉस्चराइज करें

नहाने के बाद हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं। सूखी त्वचा में दरारें इन्फेक्शन का प्रवेश द्वार बनती हैं। मॉइस्चराइजर त्वचा की नोचुरल प्रोटेक्शन को बनाए रखता है।

12. वाटरप्रूफ जूते पहनें

बारिश में बाहर निकलते समय वाटरप्रूफ जूते या सैंडल पहनें। गीले जूते नमी बनाए रखते हैं, जो फंगस के लिए अनुकूल होता है। वाटरप्रूफ जूते पैरों को सूखा रखते हैं।

13. नियमित हेल्थ जांच कराएं

असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। शुरुआती डायग्नोसिस से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

14. टाइफाइड का टीका लगवाएं

डॉक्टर से टाइफाइड के टीके के बारे में पूछें और उसे लगवाएं। टीके शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं, जो सैल्मोनेला बैक्टीरिया से रक्षा करते हैं।

15. बीमारियों के बारे में जागरूक रहें

बरसात में होने वाली बीमारियों और उनके लक्षणों की जानकारी रखें। जागरूकता से समय पर कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे बीमारियों को फैलने से रोका जा सकता है।

अगर इन्फेक्शन हो जाए तो क्या करें?

इतने सारे बचावों के बावजूद अगर इन्फेक्शन हो जाए तो ये उपाय अपनाएं-

फंगल इन्फेक्शन के लिए

स्किन इन्फेक्शन: प्रभावित क्षेत्र को साफ और सूखा रखें। ओवर-द-काउंटर एंटीफंगल क्रीम लगाएं। 3-4 दिन में कोई सुधार न हो तो डॉक्टर से मिलें।

रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन: खांसी, सांस लेने में कठिनाई या बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए

गैस्ट्रोएंटेराइटिस: खूब पानी और ओआरएस यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन पिएं। दस्त या उल्टी गंभीर हो तो डॉक्टर से मिलें।

टाइफाइड या कॉलरा: बुखार, कमजोरी या गंभीर दस्त होने पर तुरंत अस्पताल जाएं। ये जानलेवा हो सकता है।

सही जानकारी और सावधानियां जरूरी

बरसात का मौसम हेल्थ के लिए चुनौतियां खड़ी करता है, लेकिन सही जानकारी और सावधानियों से इनसे बचा जा सकता है। स्वच्छता, संतुलित आहार और जागरूकता के साथ आप फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन से सुरक्षित रह सकते हैं। अगर गंभीर लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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